रविवार, 7 सितंबर 2008

आपदा और हमारा तंत्र

बिहार में हरेक साल बाढ़ कहर बरपाता रहा है । राहत कार्य और घोटाले साथ साथ चलते रहे हैं। हमारे जैसे अनेकों इत्यादिजनो के जेहन में कुछ न कर पाने की बेबसी के बीच सवाल उभरता रहता है की ये राहती हाथ
आपदा आने से पूर्व क्यों नहीं सक्रिय होकर इसे रोक लेते हैं! ऐसे में जबकि यह निश्चित किस्म की आपदा हो।
आख़िर इसकी जिमेवारी किसकी है। अगर सब कुछ भाग्य भरोसे ही हो , तो फिर यह विकास दर, परमाणु ,चंद्र विजय , और ये लाल गुलाबी सरकारी मुस्कराहटे किस लिए हैं । हजारों- लाखों लोगों के जीवन की सुरक्षा की जिमेवारी किसकी हैं। आप नेपाल , प्राकृतिक आपदा और नदी को कब तक कसूरवार ठहराते रहेंगे? ये आधुनिक तंत्र और आपके शक्तिशाली हाथ कब तक सिर्फ़ दिखाने भर का कम आएगा! अनुपम मिश्र ने बहुत सही लिखा है कि baadh 'athiti' नहीं hai. kisi ko to jimmewari leni hi hogi. ram bharose kab tak unlogo ko kosi ke hawale karte rahenge?

2 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

यह तो कम से कम निश्चित है कि हमारा तंत्र आपदा में बिल्कुल ही काम नहीं कर पाता है। इसे सुधारने की कोई कोशिश भी नहीa होती।

Shastri ने कहा…

"आपदा आने से पूर्व क्यों नहीं सक्रिय होकर इसे रोक लेते हैं! ऐसे में जबकि यह निश्चित किस्म की आपदा हो। "

हम कब कोई काम समय पर करते हैं ??




-- शास्त्री जे सी फिलिप

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